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छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत, निर्दोष छात्रों पर फिलहाल नहीं होगी पुलिस कार्रवाई

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Posted On:Tuesday, July 28, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण अंतरिम राहत देते हुए कहा है कि दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन करने वाले निर्दोष छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल उन छात्रों के लिए है जिनके खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही कोर्ट ने नाबालिगों और बेकसूर प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा करने का निर्देश भी दिया है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे, ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किया। अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और ऐसे आंदोलनों को कानून के दायरे में देखते हुए निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन प्रदर्शनकारियों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पहचाने गए 2,873 प्रदर्शनकारियों में से 989 लोगों का आपराधिक इतिहास सामने आया है। इन पर हत्या, डकैती, लूट, अपहरण, यौन उत्पीड़न और अन्य गंभीर अपराधों के मामले दर्ज बताए गए हैं। ऐसे मामलों में जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस की कथित ज्यादतियों के सभी आरोपों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और हिंसा प्रभावित अन्य राज्यों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि छात्रों का विरोध प्रदर्शन मूल रूप से शांतिपूर्ण था और उसमें विभिन्न मांगों को संवैधानिक तरीके से उठाया गया था। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस प्रकार के शांतिपूर्ण आंदोलन स्वाभाविक हैं और इन्हें कानून के अनुरूप देखा जाना चाहिए। यदि कहीं बल प्रयोग या अधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी मामलों को एक साथ जोड़ते हुए उनकी संयुक्त सुनवाई करने का फैसला किया है। इन मामलों की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी। अदालत ने निर्देश दिया कि जांच पूरी होने तक सभी संबंधित सबूत, सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि किसी भी प्रकार की जांच प्रभावित न हो।

इस आदेश के बाद निर्दोष छात्रों और नाबालिगों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि गंभीर आपराधिक मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। अदालत का यह फैसला शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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