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बेस्ट थ्रो के बाद भी मेडल से चूके सचिन यादव, अगर ऐसा होता तो पक्का था पदक, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

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Posted On:Friday, September 19, 2025

वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में भारत को नीरज चोपड़ा से गोल्ड की बड़ी उम्मीद थी। 2023 में स्वर्ण पदक जीत चुके नीरज इस बार खरे नहीं उतर पाए। हालांकि भारत के लिए उम्मीद की एक नई किरण के रूप में सचिन यादव सामने आए, जिन्होंने अपने पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया और अपने करियर का अब तक का सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंका।

सचिन यादव की जोरदार एंट्री

जहां सभी की निगाहें नीरज चोपड़ा पर टिकी थीं, वहीं 25 वर्षीय सचिन यादव ने मैदान में उतरते ही सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। उन्होंने पहले राउंड में ही 86.27 मीटर का जबरदस्त थ्रो किया, जो उनके करियर का अब तक का सबसे लंबा थ्रो था। यही थ्रो अंत में उनका बेस्ट प्रयास भी साबित हुआ और वे चौथे स्थान पर रहे।

सचिन यादव का थ्रो स्कोर:

  • पहला राउंड: 86.27 मीटर

  • दूसरा राउंड: फाउल

  • तीसरा राउंड: 85.71 मीटर

  • चौथा राउंड: 84.90 मीटर

  • पांचवां राउंड: 85.96 मीटर

  • छठा राउंड: 80.95 मीटर

इन थ्रो के साथ सचिन ने खुद को टॉप लेवल एथलीट्स की लिस्ट में शामिल कर लिया है।

40 सेंटीमीटर से चूका मेडल

हालांकि, सचिन यादव मात्र 40 सेंटीमीटर से मेडल से चूक गए। अमेरिका के कर्टिस थॉम्पसन ने पहले ही राउंड में 86.67 मीटर का थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। अगर सचिन थोड़ी और दूरी फेंक पाते तो वो भारत के लिए एक और पदक ला सकते थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सचिन थोड़ा नर्वस थे और उन्होंने पहले थ्रो में फाउल से बचने के लिए खुद को बॉर्डर लाइन से पीछे रखा। यही गलती उनके लिए भारी पड़ी। अगर वो सही टेक्नीक के साथ बॉर्डर के नजदीक से थ्रो करते, तो थ्रो की दूरी और बढ़ सकती थी।

अनुभव से मिलेगी मजबूती

इस फाइनल में खेलने से सचिन को ना केवल आत्मविश्वास मिलेगा, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए अनुभव भी मिलेगा। वो अभी सिर्फ 25 साल के हैं और उनकी तकनीक में लगातार सुधार हो रहा है। इस मंच पर उनके प्रदर्शन ने दिखा दिया कि भारत को नीरज चोपड़ा के बाद एक और स्टार जैवलिन थ्रोअर मिल चुका है।

नीरज चोपड़ा की फीकी चमक

नीरज चोपड़ा इस बार अपनी पिछली सफलता को दोहरा नहीं सके। हालांकि उन्होंने फाइनल तक का सफर तय किया, लेकिन पदक से चूक गए। उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, जो भारतीय खेलप्रेमियों के लिए एक झटका जरूर था।

निष्कर्ष

वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में भले ही भारत को पदक नहीं मिला हो, लेकिन सचिन यादव ने एक नई उम्मीद जरूर जगा दी है। उनका प्रदर्शन साबित करता है कि भारत की एथलेटिक्स में भविष्य उज्ज्वल है। अगर वो इसी तरह मेहनत करते रहे, तो आने वाले ओलंपिक्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप में वह पक्का मेडल दावेदार बन सकते हैं।


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