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भारत में पुतिन के लिए बिछा जो रेड कार्पेट उसे देखकर क्या सोच रहे होंगे डोनाल्ड ट्रंप? समझें

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Posted On:Saturday, December 6, 2025

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रोटोकॉल तोड़कर हवाई अड्डे पर गर्मजोशी से गले मिलना और रेड कार्पेट स्वागत केवल दशकों पुरानी दोस्ती का इशारा नहीं था। यह एक ऐसा कूटनीतिक दृश्य था जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन शायद सबसे अधिक ध्यान से देख रहा होगा।

ट्रंप प्रशासन ने पिछले कुछ समय से भारत पर इतना अधिक दबाव बनाया है कि पुतिन का यह भव्य स्वागत उनके लिए चेतावनी और सीधे संदेश जैसा हो सकता है।

ट्रंप का दबाव: टैरिफ और बयानबाजी

ट्रंप प्रशासन ने रूस के साथ भारत के संबंधों को लेकर लगातार दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है:

  • टैरिफ की 'सजा': ट्रंप ने भारत पर $\text{50\%}$ तक का टैरिफ लगाया, जिसमें विशेषज्ञों का मानना है कि $\text{25\%}$ टैरिफ तो स्पष्ट रूप से रूस से तेल खरीदने की ‘सजा’ है।

  • आक्रामक बयान: ट्रंप के सलाहकार नवारो ने तो यूक्रेन युद्ध में भारत की स्थिति को लेकर कड़े बयान देते हुए इसे ‘मोदी का युद्ध’ तक कह दिया था।

इन कदमों से ट्रंप यह स्पष्ट करना चाहते थे कि अगर भारत रूस से दूरी नहीं बनाएगा, तो अमेरिका आर्थिक कीमत वसूलेगा। लेकिन पुतिन के भव्य स्वागत ने दुनिया को दिखाया कि भारत बाहरी दबाव में झुकने वाला देश नहीं है, और यही बात ट्रंप प्रशासन को सबसे ज्यादा चुभी होगी।

ट्रंप को आई 'नमस्ते ट्रंप' की याद

पुतिन को भारत में मिला सम्मान, ट्रंप को उस यादगार पल की याद दिला रहा होगा जब उनके लिए भारत में ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसा मेगा शो आयोजित किया गया था। तब पीएम मोदी ने ट्रंप को वह इज्जत और मेहमाननवाजी दी थी, जिसके लिए भारत जाना जाता है।

लेकिन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में रिश्तों में खटास आई। टैरिफ, सख्त वीज़ा नियम, रूस पर खुले लेक्चर और पाकिस्तान को लेकर परेशान करने वाले बयानों ने भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव पैदा किया। और अब, उसी भारत ने पुतिन को वही खास तवज्जो देकर यह सिद्ध कर दिया है कि भारत दोस्ती अपनी शर्तों पर करता है, दबाव में नहीं। यह संकेत ट्रंप की 'पहले अमेरिका' वाली विदेश नीति को चुनौती देता है।

पुतिन ने भी साधा निशाना

पुतिन का यह स्वागत देखकर ट्रंप निश्चित रूप से यह सोच रहे होंगे कि उनकी आर्थिक दबाव की रणनीति कहाँ गलत हो गई। उन्हें उतनी कामयाबी नहीं मिली, जितनी की उम्मीद थी। बल्कि दबाव का असर उल्टा हुआ और भारत रूस से ज्यादा करीब हो गया।

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के एक पूर्व अधिकारी ने तो यहाँ तक तंज किया कि भारत-रूस को इतना करीब लाने के लिए ट्रंप जिम्मेदार हैं और उन्हें नोबेल मिलना चाहिए।

भारत आने से पहले पुतिन ने भी ट्रंप की नीति को कमजोर करते हुए कहा था कि अमेरिका खुद रूस से न्यूक्लियर फ्यूल लेता है, तो भारत पर तेल खरीद की रोक क्यों लगाई जा रही है? पुतिन की यह यात्रा, ट्रंप प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर करती है कि भारत को झुकाने की नीति सफल नहीं होगी, और केवल साझेदारी की नीति ही काम आएगी।


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