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पश्चिम एशिया से सैन्य वापसी को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू में कूटनीतिक रार: सीरिया और लेबनान में इजरायली तैनाती कम करने पर वाशिंगटन का कड़ा दबाव

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Posted On:Thursday, July 16, 2026

वाशिंगटन/येरूशलेम: पश्चिम एशिया के जटिल रणनीतिक विन्यास में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच सैन्य तैनाती को लेकर एक नया कूटनीतिक गतिरोध मुस्तैद हो गया है। हालिया खुफिया रिपोर्टों और एक्सियोस (Axios) के विलेखों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू से सीरिया और दक्षिणी लेबनान के अग्रिम मोर्चों से इजरायली सैनिकों की वापसी प्रक्रिया को अविलंब शुरू करने का कड़ा आग्रह किया है। वाशिंगटन का मानना है कि इन क्षेत्रों में इजरायल की निरंतर जमीनी मौजूदगी सुरक्षा कवच को मजबूत करने के बजाय क्षेत्रीय अस्थिरता के सांख्यिकी जोखिम को बढ़ा रही है, जबकि तेल अवीव अपनी सेना हटाने के नियमों के सख्त खिलाफ है।

इस बड़े भू-राजनीतिक लॉजिस्टिक्स और संवाद पर गौर करें तो नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान सीरियाई नेतृत्व से हुई बातचीत के बाद अमेरिकी प्रशासन ने इस कूटनीतिक दबाव को और तेज कर दिया है। पिछले महीने अमेरिका समर्थित प्रारूप समझौते के नियमों के तहत इजरायल दक्षिणी लेबनान के दो पायलट जोन से अपनी सेना हटाकर कमान लेबनानी सेना को सौंपने पर सहमत हुआ था, लेकिन धरातल पर अभी तक कोई सांख्यिकी बदलाव मुस्तैद नहीं हुआ है। इजरायल का विधिक तर्क है कि 7 अक्टूबर के ऐतिहासिक आतंकी हमलों जैसी सीमा-पार पुनरावृत्ति को रोकने के लिए इन बफर जोन में सेना का बने रहना बेहद जरूरी है, जबकि नेतन्याहू गठबंधन के कुछ धड़े वहां दीर्घकालिक बस्तियां बसाने के पुराने विवादों को हवा दे रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने इस द्विपक्षीय विखंडनकारी बातचीत पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट की प्रामाणिकता से इनकार भी नहीं किया है। इजरायली रक्षा अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर किसी भी सैन्य बदलाव के दावों को खारिज करते हुए अपनी सुरक्षा चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा है। खेल अब पूरी तरह से वाशिंगटन के रणनीतिक दबाव, अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अनुशासित क्रियान्वयन और इजरायल की सीमावर्ती सुरक्षा प्राथमिकताओं के कड़े सांख्यिकी मापदंडों पर टिका है।


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